अक्सर अभ्यर्थी नया सिलेबस या नई किताब खरीदकर तैयारी शुरू करते हैं, जबकि परीक्षा की असली तस्वीर पुराने प्रश्नपत्रों में छिपी होती है। पिछले साल के पेपर यह बता देते हैं कि कौन से अध्याय हर बार आते हैं, प्रश्नों का स्तर कैसा रहता है और कहाँ सबसे ज्यादा अंक छूटते हैं।
एक पेपर को तीन चरणों में देखें। पहले बिना समय-सीमा के उसे समझकर हल करें, फिर उसी पेपर को परीक्षा जैसी समय-सीमा में दोबारा हल करें, और अंत में हर गलती को तीन श्रेणियों में बाँटें — जानकारी की कमी, जल्दबाज़ी और प्रश्न को गलत समझना। यह वर्गीकरण अगली पढ़ाई की दिशा तय कर देता है।
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रोज़ दो घंटे पुराने पेपरों के विश्लेषण के लिए रखें और सप्ताह के अंत में केवल अपनी गलतियों की सूची दोहराएँ। किताबें पढ़ना जारी रखें, लेकिन पेपर विश्लेषण ही यह बताएगा कि पढ़ा हुआ कितना काम आ रहा है।